Meaning of

साकी

saaki • ساقی

प्याला भरने वाला; शराब परोसने वाला

cupbearer; wine server

ساقی; شراب پیش کرنے والا

Persian

साक़ी कुछ आज तुझ को ख़बर है बसंत की
हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की

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नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

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ता'रीफ़ सुन रहा हूँ बहुत तेरे हाथ की
साक़ी मेरे लिए भी ज़रा सी निकाल दे

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वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ
नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ

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अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे

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बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के
ला मुझे दे दे तिरे किस काम के

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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल न पूछिए 'मजरूह'
शराब एक है बदले हुए हैं पैमाने

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बढ़ाई मय जो मोहब्बत से आज साक़ी ने
ये काँपे हाथ कि साग़र भी हम उठा न सके

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किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज
सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग

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मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी
तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से

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साक़ी कुछ आज तुझ को ख़बर है बसंत की
हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की

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नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

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‘साक़ी’ केवल शराब परोसने वाला नहीं है; यह दिव्य मादकता और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है। कविता में, साक़ी अक्सर प्रिय या दिव्य का प्रतिनिधित्व करता है, प्रेम और ज्ञान की शराब पेश करता है।

कवि 'साक़ी' का आह्वान प्रेम, मादकता और आध्यात्मिक खोज के विषयों की खोज के लिए करते हैं। साक़ी एक मार्गदर्शक है, जो आत्मा को जीवन की सराय के माध्यम से ले जाता है, दिव्यता की झलक पेश करता है।

काव्य जगत में, 'साक़ी' एक कालातीत आकृति है, जो सांसारिक और दिव्य के बीच सेतु बनाता है।