Meaning of

सबक़

sabak • سبق

पाठ; नैतिक शिक्षा

lesson; moral

سبق; اخلاقی تعلیم

Arabic

जीने का बस एक यही ढब अच्छा है
मेरा तेरा सबका ही रब अच्छा है

बंदा हो तो यार हमारे जैसा हो
सब कुछ खो कर भी बोले, सब अच्छा है

37

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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त

ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त

157

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सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले
फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले

87

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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है
फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है

सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं
बस इक लड़की का बोसा लौटाना है

60

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कुल जोड़ घटाकर जो ये संसार का दुख है
उतना तो मिरे इक दिल-ए-बेज़ार का दुख है

शाइ'र हैं तो दुनिया से अलग थोड़ी हैं लोगों
सबकी ही तरह हमपे भी घर बार का दुख है

52

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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं

51

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दर्द सहने का हुनर तो पास सबके है मगर
दर्द कहने का हुनर बस शाइरों के पास है

44

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ख़ुशियाँ जेबों में गिर आईं
भागी संकट की आँधी है

ताबीज़ बना कर जब सबकी
बहनों ने राखी बाँधी है

42

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चल रहा है हर कोई ये पोटली अपनी लिए
छीनो माधव पोटली जो काँख में सबके दबी

40

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बस इक झुमका भी यूँँ तो होश सबके छीन लेता है
मगर उन को दिखावे की इक आदत है न जाने क्यूँँ

मुझे तो देखने की भी मनाही है परायों को
उन्हें सीने लगाने की इजाज़त है न जाने क्यूँँ

40

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जीने का बस एक यही ढब अच्छा है
मेरा तेरा सबका ही रब अच्छा है

बंदा हो तो यार हमारे जैसा हो
सब कुछ खो कर भी बोले, सब अच्छा है

37

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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त

ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त

157

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'सबक़' का मूल अर्थ पाठ या नैतिक शिक्षा है। कविता में, यह अक्सर अनुभवों से प्राप्त ज्ञान, जीवन की मौन शिक्षाओं, और प्रकृति और संबंधों में पाई जाने वाली सूक्ष्म मार्गदर्शन का प्रतीक होता है।

कवि 'सबक़' का उपयोग जीवन की शिक्षाओं पर विचार करने के लिए करते हैं, अक्सर व्यक्तिगत विकास और सार्वभौमिक सत्य के बीच समानताएं खींचते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो चिंतन और आत्मनिरीक्षण को आमंत्रित करता है।

'सबक़' जीवन की मौन शिक्षाओं की एक कोमल याद दिलाता है।