
बस इक झुमका भी यूँँ तो होश सबके छीन लेता है
मगर उन को दिखावे की इक आदत है न जाने क्यूँ
मुझे तो देखने की भी मनाही है परायों को
उन्हें सीने लगाने की इजाज़त है न जाने क्यूँ
— Amaan Pathan
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