Meaning of

सबक़

sabq • سبق

पाठ; नैतिक शिक्षा; उदाहरण

lesson; moral; example

سبق; اخلاقی سبق; مثال

Arabic

हमारा था यही पहला सबक़ के
हमें असरार खुलवाने नहीं हैं

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किस मुँह से करें उन के तग़ाफ़ुल की शिकायत
ख़ुद हम को मोहब्बत का सबक़ याद नहीं है

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वो चाहे मजनूँ हो, फ़रहाद हो कि राँझा हो
हर एक शख़्स मेरा हम सबक़ निकलता है

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किताबें पढ़ रहे हो तुम मगर बस याद ये रखना
सबक़ सब ज़िन्दगी के ज़िन्दगी में ज़िन्दगी देगी

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ये इश्क़ ख़ुद में है अहमक़ाना तो आप अफ़हाम ढूँढ़ते हो
नया सा शायद सबक़ है महशर-ख़िराम का गाम ढूँढ़ते हो

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आता है काम कब ये सिखाया हुआ सबक़
सब सीख के भी हाथ पे छाले पड़े रहे

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नहीं जाना कभी हम ने सबक़ क्या आशिक़ी देगी
दिखा कर हिज़्र की रातें बसल के गीत गाती है

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दग़ा कर के हम सेे किनारा किए
बिना उस के हम यूँँ गुज़ारा किए

सबक़ ज़िंदगी का मिला यूँँ हमें
मुहब्बत न फिर हम दुबारा किए

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इश्क़ ओ वफ़ा के सारे वरक़ भूल गए हैं
हम पर किसी का कितना था हक़ भूल गए हैं

ऐ मौत इक सिवाए तेरे याद नहीं कुछ
जितने पढ़े थे सारे सबक़ भूल गए हैं

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सिखा दिया है कई आँधियों को मैं ने सबक़
मैं इक चराग़ हूँ मेरा भी अपना रुतबा है

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हमारा था यही पहला सबक़ के
हमें असरार खुलवाने नहीं हैं

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किस मुँह से करें उन के तग़ाफ़ुल की शिकायत
ख़ुद हम को मोहब्बत का सबक़ याद नहीं है

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'सबक़' का मूल अर्थ पाठ या शिक्षा है, जिसमें अक्सर नैतिकता का पुट होता है। कविता में यह अनुभवों से प्राप्त ज्ञान का प्रतीक बन जाता है, चाहे वे सुखद हों या दुखद।

कवि अक्सर 'सबक़' का प्रयोग जीवन की शिक्षाओं पर विचार करने के लिए करते हैं। यह प्रेम के खट्टे-मीठे पाठ, वास्तविकता की कठोर सच्चाइयाँ, या प्रकृति की कोमल बुद्धिमत्ता को दर्शा सकता है।

कविता में 'सबक़' जीवन द्वारा प्रस्तुत अनेक पाठों का दर्पण बन जाता है, प्रत्येक अपने रंग और गहराई के साथ।