इश्क़ ओ वफ़ा के सारे वरक़ भूल गए हैंहम पर किसी का कितना था हक़ भूल गए हैंऐ मौत इक सिवाए तेरे याद नहीं कुछजितने पढ़े थे सारे सबक़ भूल गए हैं— A R Sahil "Aleeg"