Meaning of

संग-ए-दिल

sang-e-dil • سنگ دل

पत्थर दिल; निष्ठुर

stone-hearted; unfeeling

سنگ دل; بے حس

Persian

मेरे अल्फ़ाज़ की ता'बीर हो तहरीर भी तसनीफ़ भी हो शा'इरी की तुम
मगर अब इश्क़ के इस संग-दिल बस्ती में कोई शा'इरी मुझ से नहीं होती

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हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
हमीं को शमा' जलाने का हौसला न हुआ

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मैं ने चाहा भी कि फिर इस संग-दिल पे फूल उगे
पर तुम्हारी रुख़्सती के बा'द ये होता नहीं

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रंज से जो भर गए ख़ुद से लिपट के रो लिए
संग दिल को क्या सुनाते हम फ़साना दर्द का

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जितना हमें दिया गया उतना तो कम नहीं
कुछ छूट भी गया तो हमें उस का ग़म नहीं

मैं कितना संग-दिल हूँ ये तो और बात है
वो ख़ुश है इस लिए भी मिरी आँख नम नहीं

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मेरे अल्फ़ाज़ की ता'बीर हो तहरीर भी तसनीफ़ भी हो शा'इरी की तुम
मगर अब इश्क़ के इस संग-दिल बस्ती में कोई शा'इरी मुझ से नहीं होती

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हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
हमीं को शमा' जलाने का हौसला न हुआ

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'संग-ए-दिल' वाक्यांश एक ऐसे दिल की छवि प्रस्तुत करता है जो पत्थर की तरह कठोर और अडिग होता है। कविता में, यह भावनात्मक ठंडक और सहानुभूति या करुणा महसूस करने में असमर्थता का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'संग-ए-दिल' का उपयोग उन पात्रों को चित्रित करने के लिए करते हैं जो दूसरों के कष्टों के प्रति उदासीन होते हैं। यह गर्मजोशी और कोमलता की छवियों के विपरीत होता है, एक ठंडे दिल की कठोरता को उजागर करता है।

कविता की दुनिया में, 'संग-ए-दिल' भावनात्मक बाधाओं की एक कठोर याद दिलाता है जो मानव आत्मा को अलग कर सकती हैं।