Meaning of

शब-ए-ग़म

shab-e-gham • شب غم

दुःख की रात; शोक की रात

night of sorrow; night of grief

غم کی رات; دکھ کی رات

Persian

शब-ए-ग़म से बड़ा बेचैन हूँ मैं
ख़यालों में मिरे बस ख़ुद-कुशी है

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कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता

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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

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शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

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आधी से ज़ियादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ
अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है

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मैं तमाम रात तड़पा मैं तमाम रात जागा
कोई पास आ रहा है शब-ए-ग़म पिघल रही है

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शब-ए-ग़म ने किया मजबूर रोने पे
वगरना हम नहीं थे रोने वालो में

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शब-ए-ग़म से बड़ा बेचैन हूँ मैं
ख़यालों में मिरे बस ख़ुद-कुशी है

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कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता

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अपने मूल अर्थ में, 'शब-ए-ग़म' दुःख से भरी रात की गहराई और स्थिरता को दर्शाता है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि ऐसी रातों की अंतरंग एकांतता और चिंतन को व्यक्त किया जा सके, जहाँ हृदय की मौन विलाप को चित्रित किया जाता है।

'शब-ए-ग़म' का उपयोग कवि अक्सर तड़प और खोने के विषयों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह अंधकार और आत्मा की सांत्वना की चाह के बीच के संबंध को खोजने के लिए एक कैनवास के रूप में कार्य करता है। रात एक विश्वासपात्र बन जाती है, हृदय के अनकहे शब्दों को सुनती है।

'शब-ए-ग़म' की शांत गोद में, कवि आत्मा के गहरे दुःखों का दर्पण पाते हैं। यह एक ऐसी रात है जो बिना शब्दों के बोलती है।