Meaning of

शौक़-ए-पैहम

shauq-e-paiham • اضطراب

निरंतर उत्साह; अविरल चाहत

continuous passion; relentless desire

مسلسل جوش; بے پناہ خواہش

Persian

हमें कल देख टी वी पर भला क्या सोच रोओगी
यही बस सोच दिल से यार ये मलबा उतर आया

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बार बार उस के दर पे जाता हूँ
हालत अब इज़्तिराब की सी है

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रोए बग़ैर चारा न रोने की ताब है
क्या चीज़ उफ़ ये कैफ़ियत-ए-इज़्तिराब है

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मिले इज़्तिराब-ओ-दर्द बस न लगे ये रोग तुम्हें कभी
वो रहा क़रीब सदा मिरे न बिछड़ सके न मिले कभी

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हमें तो ठीक से तो शा'इरी भी अब नहीं आती
पता तो है नहीं कैसे ग़ज़ल अनवर उतर आया

हमें कल देख टी वी पर भला क्या सोच रोओगी
यही बस सोच दिल से यार ये मुख़्बर उतर आया

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हमें कल देख टी वी पर भला क्या सोच रोओगी
यही बस सोच दिल से यार ये मलबा उतर आया

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बार बार उस के दर पे जाता हूँ
हालत अब इज़्तिराब की सी है

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शब्द 'शौक़-ए-पैहम' एक अनवरत उत्साह और एक ऐसी चाहत का भाव जगाता है जो कभी मद्धम नहीं पड़ती। कविता में, यह एक ऐसे दिल की भावना को पकड़ता है जो हमेशा खोज में रहता है, कभी नहीं थमता, हमेशा तड़पता रहता है।

'शौक़-ए-पैहम' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम या सत्य की निरंतर खोज को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक कलाकार के सृजन के प्रति अटल जुनून या एक प्रेमी की मिलन की अनंत खोज का प्रतीक हो सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'शौक़-ए-पैहम' मानव आत्मा के अटल उत्साह का प्रमाण है। यह हमें याद दिलाता है कि कुछ इच्छाएँ शाश्वत होती हैं।