Meaning of

शेख़

shekh • شیخ

बुज़ुर्ग; नेता; विद्वान

elder; leader; scholar

بزرگ; رہنما; عالم

Arabic

कल ये पैग़ाम हर इक पीर-ओ-जवां तक पहुँचे
हाल-ए-अफ़सुर्दा में हम कू-ए-बुताँ तक पहुँचे

0

Download Image

तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो
दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें

29

Download Image

हम शैख़, न लीडर, न मुसाहिब, न सहाफ़ी
जो ख़ुद नहीं करते वो हिदायत न करेंगे

26

Download Image

इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ

24

Download Image

शेख़ साहब मिले दुआएँ दी
और बोले कि याद रब को करो

7

Download Image

उन से दोज़ख़ में पूछ बैठा हूँ
शैख़ जी आप और यहाँ कैसे

7

Download Image

ऐ शैख़ तू शराब के पीछे न पड़ कभी
ये ख़ुद को वाहियात बनाने की चीज़ है

5

Download Image

गिरा के हाथ से देखो तो मेरे जाम-ए-शराब
ये शैख़ कहता है पीना हराम है साक़ी

2

Download Image

है उन को नफ़रत भी मुस्लिमों से मगर वो शेख़ों से मिल रहे हैं
ये कैसी रिश्तों की दास्ताँ है ये इश्क़-ओ-फ़ितरत नहीं चलेगी

जला के घर को ग़रीब की तुम अगर जो सेंकोगे रोटियाँ फिर
ज़ियादा दिन तक समझ लो हाकिम यहाँ हुकूमत नहीं चलेगी

2

Download Image

जाम-ए-लबरेज़ लिए दस्त-ए-मुबारक में शजर
शैख़ जी रोकिए मस्जिद की तरफ़ जाता है

1

Download Image

कल ये पैग़ाम हर इक पीर-ओ-जवां तक पहुँचे
हाल-ए-अफ़सुर्दा में हम कू-ए-बुताँ तक पहुँचे

0

Download Image

तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो
दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें

29

Download Image

'शेख़' मूल रूप से एक बुज़ुर्ग या अधिकार और ज्ञान वाले व्यक्ति को संदर्भित करता है। कविता में, यह अक्सर एक ज्ञानी मार्गदर्शक या आध्यात्मिक नेता की छवि को उजागर करता है, जो ज्ञान और अनुभव के गुणों को समेटे होता है।

कवि 'शेख़' का उपयोग ज्ञान और अधिकार के प्रतीक के रूप में करते हैं। यह युवा नासमझी या अज्ञानता के विपरीत होता है, और अक्सर कथा में एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में कार्य करता है।

'शेख़' शब्द एक कालातीत श्रद्धा को वहन करता है, जो पीढ़ियों से परे ज्ञान के सार को समेटे होता है।