Meaning of

शोख़

shokh • شوخ

शरारती; चंचल; जीवंत

mischievous; playful; lively

شوخ; چنچل; زندہ دل

Persian

शोख़ ने क्या ही ज़ुल्फ़ लहराई
अज़-फ़लक बारिशें निकल आईं

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उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

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निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ
किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले

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शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम
ज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुम

चाहे महफ़िल में रहूँ चाहे अकेले में रहूँ
गूँजती रहती हो मुझ में शोख़ शहनाई सी तुम

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हम तो उस आँख के हैं देखने वाले, देखो
जिस
में शोख़ी है बहुत और हया थोड़ी सी

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हरीम-ए-नाज़ के पर्दे में जो निहाँ था कभी
उसी ने शोख़ अदाएँ दिखा के लूट लिया

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इलाही ने मुझे है शोख़ दी महबूब ये आँखें
कभी मेरी नज़र से देख कितना ख़ूब-सूरत है

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फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई
शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया

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दूर साहिल से कोई शोख़ इशारा भी नहीं
डूबने वाले को तिनके का सहारा भी नहीं

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उस के गालो की ख़ला से मेरा बोसा बिगड़ा है
दूर रक्खें शोख़ बच्चो को सभी दीवार से

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शोख़ ने क्या ही ज़ुल्फ़ लहराई
अज़-फ़लक बारिशें निकल आईं

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उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

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शोख़ युवा उत्साह और एक चंचल आत्मा की हल्केपन की भावना को समेटे हुए है। कविता में, यह अक्सर मासूमियत के आकर्षण और जीवंत बातचीत के आकर्षण को दर्शाता है।

कवि 'शोख़' का उपयोग छेड़छाड़ के सार और युवा आत्माओं के नृत्य को पकड़ने के लिए करते हैं। यह गंभीर स्वरों के विपरीत है, आनंद और जीवंतता की भावना लाता है।

कविता की दुनिया में, 'शोख़' जीवन के चंचल क्षणों का उत्सव है। यह हमें सहजता और जीवंत आदान-प्रदान में पाई जाने वाली खुशी की याद दिलाता है।