Meaning of

सुबक

subak • سبک

हल्का; फुर्तीला; कोमल

light; nimble; gentle

ہلکا; پھرتیلا; نرم

Persian

ये ना कहो कि सुखन से सबका नाता है
हाँ, ये कहो कि सुखन का सब सेे नाता है

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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त

ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त

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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है
फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है

सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं
बस इक लड़की का बोसा लौटाना है

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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं

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चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का
हवा के पास कोई मसलहत नहीं होती

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जीने का बस एक यही ढब अच्छा है
मेरा तेरा सबका ही रब अच्छा है

बंदा हो तो यार हमारे जैसा हो
सब कुछ खो कर भी बोले, सब अच्छा है

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हम-रही की बात मत कर इम्तिहाँ हो जाएगा
हम सुबुक हो जाएँगे तुझ को गिराँ हो जाएगा

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सबका जो इन दिनों है मसीहा बना हुआ
उस सेे ये पूछना कि मोहब्बत का क्या हुआ?

हँसता हूँ मैं जो हिज्र में तो पूछते हैं सब
पतझड़ के दिन में पेड़ ये कैसे हरा हुआ?

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सबका मिलना दोस्त कहाँ हो पाता है
हम जैसों को हसरत ज़िंदा रखती है

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बहुत खोजा मगर फिर भी किनारा ना मिला मुझ को
मिला सबका मगर तेरा सहारा ना मिला मुझ को

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ये ना कहो कि सुखन से सबका नाता है
हाँ, ये कहो कि सुखन का सब सेे नाता है

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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त

ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त

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'सुबक' शब्द हल्केपन और फुर्ती का आभास कराता है, जैसे कि एक हल्की हवा का झोंका या नर्तकी के फुर्तीले कदम। कविता में, यह कुछ ऐसा पकड़ता है जो कोमल और तेज़ दोनों है, एक सहज लेकिन गहन अनुग्रह को समेटे हुए।

कवि अक्सर 'सुबक' का उपयोग प्रकृति की कोमल लहर, सौंदर्य के क्षणिक पल, या दिल से गुजरने वाली कोमल भावनाओं का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह भारी, अधिक बोझिल शब्दों के विपरीत है, क्षणभंगुर और सुंदरता को उजागर करता है।

'सुबक' अपनी काव्यात्मक सार में, हल्केपन में सुंदरता और सरलता में शान की याद दिलाता है।