Meaning of

सुख़न-वरो

sukhan-varo • سخن ورو

कवि; शब्दकार

poets; wordsmiths

شاعر; سخن ور

Persian

हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ पे मरना तो लाज़मी है
मगर क़सम से सुख़न-वरों के कलाम ज़िन्दा रहा करेंगे

लगा के रक्खे अभी से पौधे ये छाँव देंगे मुसाफ़िरों को
उन्हीं दरख़्तों पे फिर परिंदे बसा के दुनिया उड़ा करेंगे

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आँख से मुहब्बत के जब ख़ुमार जाएँगे
हम सुख़न-वरों के तो रोज़गार जाएँगे

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हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ पे मरना तो लाज़मी है
मगर क़सम से सुख़न-वरों के कलाम ज़िन्दा रहा करेंगे

लगा के रक्खे अभी से पौधे ये छाँव देंगे मुसाफ़िरों को
उन्हीं दरख़्तों पे फिर परिंदे बसा के दुनिया उड़ा करेंगे

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आँख से मुहब्बत के जब ख़ुमार जाएँगे
हम सुख़न-वरों के तो रोज़गार जाएँगे

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यह शब्द उन लोगों की छवि प्रस्तुत करता है जो भाषा को सुंदरता और गहराई से गढ़ते हैं। कविता में, यह शब्दों पर महारत और भावनाओं और विचारों की नाजुक बुनाई का संकेत देता है।

अक्सर उन कवियों का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है जो अपनी वाक्पटुता के लिए सम्मानित होते हैं। यह उन लोगों के प्रति सम्मान का भाव भी व्यक्त कर सकता है जो अव्यक्त को व्यक्त कर सकते हैं।

सुख़न-वरो शब्दों और भावनाओं के शाश्वत नृत्य को समाहित करता है।