
हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ पे मरना तो लाज़मी है
मगर क़सम से सुख़न-वरों के कलाम ज़िन्दा रहा करेंगे
लगा के रक्खे अभी से पौधे ये छाँव देंगे मुसाफ़िरों को
उन्हीं दरख़्तों पे फिर परिंदे बसा के दुनिया उड़ा करेंगे
— Kartik Bhalerao
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