Meaning of

तारीख़

taarikh • مقرر

तारीख़; इतिहास

date; history

تاریخ; تاریخ

Arabic

कल बदल दूँगा घर का कैलेंडर मैं भी
ज़ेहन में पर कुछ तारीख़ें रह जाएगी

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तारीख़ आ गई है उधर कार्ड छप गए
अब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद

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मुक़र्रर दिन नहीं तो लम्हा-ए-इमकान में आओ
अगर तुम मिल नहीं सकती तो मेरे ध्यान में आओ

बला की ख़ूब-सूरत लग रही हो आज तो जानाँ
मुझे इक बात कहनी थी तुम्हारे कान में.. आओ

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कोर्ट में तारीख़ के ये सिलसिले चलते रहे
और वो लड़की वहाँँ पर शर्म से ही मर गई

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ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने
लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई

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लोगों के फेंके पत्थर सहते रहना
दरिया की फ़ितरत में है बहते रहना

आख़िर शे'र ख़तम कर जाने वाला हूँ
अच्छा तुम लोग मुकर्रर कहते रहना

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चाहे जितना तारीख़ तूल कर लेना
लेकिन जानी हम को क़ुबूल कर लेना

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नवंबर दो, दिया था हिज्र का तोहफ़ा
उसी तारीख़ को मातम मनाता हूँ

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मोहब्बत का नहीं इक दिन मुकर्रर
मोहब्बत उम्रभर का सिलसिला है

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क़ीमत मुकर्रर है तिरी
हम तो मुनासिब दाम हैं

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कल बदल दूँगा घर का कैलेंडर मैं भी
ज़ेहन में पर कुछ तारीख़ें रह जाएगी

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तारीख़ आ गई है उधर कार्ड छप गए
अब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद

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अपने मूल अर्थ में, 'तारीख़' एक विशेष दिनांक या घटनाओं के रिकॉर्ड को संदर्भित करता है। समय के साथ, यह इतिहास के भार को भी समेटने लगा है, जो समय के साथ बुनी गई मानव अनुभव की एक गाथा है।

'तारीख़' का उपयोग कवि अक्सर समय के प्रवाह को व्यक्त करने या इतिहास के सबक पर चिंतन करने के लिए करते हैं। यह परिवर्तन की अनिवार्यता, मानव संघर्षों की निरंतरता, या अतीत की महिमा की गूंज का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'तारीख़' अतीत और वर्तमान के बीच एक पुल के रूप में कार्य करता है, जो मानव आत्मा की स्थायित्व की याद दिलाता है।