लोगों के फेंके पत्थर सहते रहनादरिया की फ़ितरत में है बहते रहनाआख़िर शे'र ख़तम कर जाने वाला हूँअच्छा तुम लोग मुकर्रर कहते रहना— Nirvesh Navodayan