Meaning of

तकब्बूर

takabboor • تکبر

अहंकार; गर्व

arrogance; pride

غرور; فخر

Arabic

ये सावन ,माह ये ज़ुल्मी जवानी
ज़माने बा'द सब कच्चा लगेगा

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तेरी यादें जब जब भी तड़पाती हैं
तब तब हम मयखाना अक्सर जाते हैं

इतना तकब्बुर है तेरे लहजे में जान
तुझ को देख के हम सच में डर जाते हैं

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कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई ख़ानदानी दुश्मनी की बात है

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हो रहा उस पे मुर्शद असर संग का
उस के अंदर तकब्बुर है बे-ढंग का

दिल मचलता है मेरा उसे देख कर
जो पहनती है बुर्क़ा हरे रंग का

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ये दुनिया है कहेगी कुछ उसे कच्चा समझती है
कि सौतेली अगर है भी प' माँ बच्चा समझती है

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हमारा शे'र क्या कहता नहीं है
हमारा तजरबा कच्चा नहीं है

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लफ़्ज़ों के इस्तिमाल में कच्चा हूँ इस लिए
समझो ये दिल की बात हमें तुम सेे प्यार है

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अगर जो प्यार इक तरफ़ा रहे पूरा नहीं होता
मगर इस प्यार का धागा कभी कच्चा नहीं होता

मनाना छोड़ देता है अगर जो कोई झगड़े में
परेशाँ हो चुका होता है वो रूठा नहीं होता

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उस को डर है कि तकब्बुर न कहीं आ जाए
आँख रखता है झुका कर के वो ख़ैरात के बा'द

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मुफ़लिसी की ज़ात ने लज़्ज़त वो सारी छीन ली
धान भी कच्चा ज़बाँ को ज़ाइक़ा देने लगा

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ये सावन ,माह ये ज़ुल्मी जवानी
ज़माने बा'द सब कच्चा लगेगा

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तेरी यादें जब जब भी तड़पाती हैं
तब तब हम मयखाना अक्सर जाते हैं

इतना तकब्बुर है तेरे लहजे में जान
तुझ को देख के हम सच में डर जाते हैं

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तकब्बूर एक ऐसा भाव है जो व्यक्ति के आत्ममूल्य को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है, जिससे विनम्रता के गुण छिप जाते हैं। कविता में, यह गर्व की आंतरिक उथल-पुथल को दर्शाता है, जहाँ हृदय आत्मप्रेम और विनम्रता के मधुर आह्वान के बीच संघर्ष करता है।

कवि अक्सर तकब्बूर का उपयोग अत्यधिक गर्व के कारण पतन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह विनम्रता के विपरीत है, जो सांसारिक उपलब्धियों की क्षणभंगुर प्रकृति को उजागर करता है।

तकब्बूर हमें गर्व और विनम्रता के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है। अपनी काव्यात्मक सार में, यह हृदय की यात्रा की एक चेतावनी कथा है।