Meaning of

तखलीफ़

takhleef • تکلیف

कष्ट; असुविधा; पीड़ा

trouble; discomfort; distress

تکلیف; پریشانی; اذیت

Arabic

रोज़ ही सताती हैं हम को घर की तकलीफ़ें
शौक़ से कभी कोई नौकरी नहीं करता

6

Download Image

दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

65

Download Image

गया था माँगने ख़ुशबू मैं फूल से लेकिन
फटे लिबास में वो भी गदा लगा मुझ को

22

Download Image

फ़क़त अपनी तकलीफ़ दिखती है तुझ को
कभी तू समझता है इंसान मुझ को

22

Download Image

बुरा हो वक़्त तो इंसान भी ख़ामोश हो जाता
सही से ज़िंदगी का अर्थ तो तकलीफ़ समझाता

11

Download Image

किसी को याद करना भी किसी को याद आना भी
बहुत तकलीफ़ देता है किसी को भूल जाना भी

बड़ी मुश्किल से आती है ख़ुशी मुफ़लिस के आँगन में
कहाँ भाता है क़िस्मत को किसी का मुस्कुराना भी

10

Download Image

तकलीफ़ में है वो भी मुझे देख के तन्हा
मजबूरी उस की ये है कुछ कर नहीं सकती

9

Download Image

ऐसे चाहो मुझे के हद कर दो
वरना ये सिलसिला ही रद्द कर दो

साँस तकलीफ़ में मैं लेती हूँ
साँस लेने में तुम मदद कर दो

8

Download Image

अच्छा हो या लाख बुरा हो पर किरदार का सच्चा हो
हम को बस तकलीफ़ रही है रंग बदलते लोगों से

8

Download Image

कभी तकलीफ़ होती थी तो तुम को याद करते थे
अभी जब याद करते हैं, बहुत तकलीफ़ होती हैं

6

Download Image

रोज़ ही सताती हैं हम को घर की तकलीफ़ें
शौक़ से कभी कोई नौकरी नहीं करता

6

Download Image

दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

65

Download Image

तखलीफ़ शब्द असुविधा और पीड़ा की भावना को जगाता है, जो अक्सर शारीरिक या भावनात्मक दर्द से जुड़ा होता है। कविता में, यह अपने शाब्दिक अर्थ से आगे बढ़कर जीवन के गहरे संघर्षों और दुखों को समेट लेता है, मानव स्थिति की एक जीवंत तस्वीर पेश करता है।

कवि अक्सर 'तखलीफ़' का उपयोग आत्मा के आंतरिक उथल-पुथल को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो पीड़ा के सार को पकड़ता है, चाहे वह एकतरफा प्रेम, अस्तित्वगत भय, या समय के गुजरने के माध्यम से हो।

कविता में, 'तखलीफ़' दिल की मौन चीखों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह मानव आत्मा की दृढ़ता का प्रमाण है।