
किसी को याद करना भी किसी को याद आना भी
बहुत तकलीफ़ देता है किसी को भूल जाना भी
बड़ी मुश्किल से आती है ख़ुशी मुफ़लिस के आँगन में
कहाँ भाता है क़िस्मत को किसी का मुस्कुराना भी
— Aadil Rahi
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