Meaning of

तक़लीब

taqleeb • تکلیف

दर्द; असुविधा; परेशानी

pain; discomfort; trouble

درد; تکلیف; پریشانی

Arabic

रोज़ ही सताती हैं हम को घर की तकलीफ़ें
शौक़ से कभी कोई नौकरी नहीं करता

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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

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गया था माँगने ख़ुशबू मैं फूल से लेकिन
फटे लिबास में वो भी गदा लगा मुझ को

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फ़क़त अपनी तकलीफ़ दिखती है तुझ को
कभी तू समझता है इंसान मुझ को

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बुरा हो वक़्त तो इंसान भी ख़ामोश हो जाता
सही से ज़िंदगी का अर्थ तो तकलीफ़ समझाता

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किसी को याद करना भी किसी को याद आना भी
बहुत तकलीफ़ देता है किसी को भूल जाना भी

बड़ी मुश्किल से आती है ख़ुशी मुफ़लिस के आँगन में
कहाँ भाता है क़िस्मत को किसी का मुस्कुराना भी

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तकलीफ़ में है वो भी मुझे देख के तन्हा
मजबूरी उस की ये है कुछ कर नहीं सकती

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ऐसे चाहो मुझे के हद कर दो
वरना ये सिलसिला ही रद्द कर दो

साँस तकलीफ़ में मैं लेती हूँ
साँस लेने में तुम मदद कर दो

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अच्छा हो या लाख बुरा हो पर किरदार का सच्चा हो
हम को बस तकलीफ़ रही है रंग बदलते लोगों से

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कभी तकलीफ़ होती थी तो तुम को याद करते थे
अभी जब याद करते हैं, बहुत तकलीफ़ होती हैं

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रोज़ ही सताती हैं हम को घर की तकलीफ़ें
शौक़ से कभी कोई नौकरी नहीं करता

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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

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'तक़लीब' शब्द आंतरिक उथल-पुथल और शारीरिक असुविधा की भावना को जगाता है। कविता में, यह अक्सर भावनात्मक और अस्तित्वगत संघर्षों को शामिल करता है, मानव स्थिति की नाजुकता का चित्रण करता है।

कवि 'तक़लीब' का उपयोग मानव पीड़ा की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अप्राप्त प्रेम के दर्द, भाग्य के खिलाफ संघर्ष, या आत्मा की मौन चीखों का वर्णन कर सकता है।

'तक़लीब' अपने सार में पीड़ा के सार्वभौमिक अनुभव को पकड़ता है, हमारी साझा नाजुकता की याद दिलाता है।