Meaning of

तारीक

tareek • تاریک

अंधकारमय; उदास

dark; gloomy

تاریک; اداس

Arabic

घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था

दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था

3

Download Image

तारीकियों को आग लगे और दिया जले
ये रात बैन करती रहे और दिया जले

उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब
वो रौशनी की बात करे और दिया जले

103

Download Image

चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

33

Download Image

ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़

22

Download Image

तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

19

Download Image

तारीकियाँ हैं साथ मिरे और सफ़र मुदाम
कल तक था हम-क़दम जो फ़रिश्ता किधर गया

19

Download Image

एक तरीका एब्स बनाने का सीखो
योग करो या घुट घुट के मरना सीखो

योग नहीं कर सकते तो इक काम करो
तुम तो बस फ़ोटो एडिट करना सीखो

10

Download Image

तारीकी से जलता है दीवारें इस की हैं मुख़बिर
रात में साया एक दिए को तेल लगाके आया है

4

Download Image

मन में रहने वाले को सब दिखता है
इस घर में कोई बेज़ार नहीं होता

इश्क़ तरीका है करने वालों के लिए
दोस्त बदन इस का इज़हार नहीं होता

3

Download Image

अगर वो रूठ जाए तो तरीका ये नया करती
कभी कंगन खनकते थे कभी पायल बजा करती

बड़ी मुश्किल से ख़्वाबों को हक़ीक़त में बदलते थे
गली से तब गुज़रता था वो चौखट पर हुआ करती

3

Download Image

घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था

दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था

3

Download Image

तारीकियों को आग लगे और दिया जले
ये रात बैन करती रहे और दिया जले

उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब
वो रौशनी की बात करे और दिया जले

103

Download Image

'तारीक' शब्द गहरे अंधकार की भावना को जागृत करता है, जो शाब्दिक और रूपक दोनों है। कविता में, यह अक्सर निराशा, रहस्य, या अज्ञात का प्रतीक होता है, जो एक पृष्ठभूमि बनाता है जिसके खिलाफ प्रकाश और आशा का विरोध किया जाता है।

कवि 'तारीक' का उपयोग विषाद और आत्मनिरीक्षण के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह आत्मा के छायादार कोनों के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है, जहाँ भय और संदेह निवास करते हैं, फिर भी जहाँ परिवर्तन के बीज बोए जाते हैं।

'तारीक' में, कविता को मानव मनोविज्ञान की गहराई का पता लगाने के लिए एक कैनवास मिलता है, जहाँ अंधकार और प्रकाश एक नाजुक संतुलन में सह-अस्तित्व रखते हैं।