Meaning of

तारीक़

tareeq • تاریک

अंधेरा; उदास; अस्पष्ट

dark; gloomy; obscure

اندھیرا; اداس; مبہم

Arabic

ज़िंदा रहने की ये तरक़ीब निकाली हम ने
बात बिगड़ी हुई कुछ ऐसे सँभाली हम ने

उस सेे समझौता किया है उसी की शर्तों पे
जान भी बच गई इज़्ज़त भी बचा ली हम ने

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किसी के साए को क़ैद करने का एक तरीक़ा बता रहा हूँ
एक उस के आगे चराग़ रख दे, एक उस के पीछे चराग़ रख दे

मैं दिल की बातों में आ गया और उठा के ले आया उस की पायल
दिमाग़ देता रहा सदाएँ, चराग़ रख दे, चराग़ रख दे

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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

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बात करने का हसीं तौर-तरीक़ा सीखा
हम ने उर्दू के बहाने से सलीक़ा सीखा

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सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे

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अपनी नज़रों में गिर चुका हूँ मैं
ये तरीक़ा भी ख़ुद-कुशी का था

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तरीक़ा मिल ही जाएगा मुझे तुम तक पहुँचने का
कि जैसे साँस ख़ुद सीने के रस्ता ढूँढ़ लेती है

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ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़

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तारीकियाँ हैं साथ मिरे और सफ़र मुदाम
कल तक था हम-क़दम जो फ़रिश्ता किधर गया

19

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एक तरीक़ा बर्बादी का, हम ने यूँँ ईजाद किया
शब भर तन्हा-तन्हा रोए, मायूसी को शाद किया

12

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ज़िंदा रहने की ये तरक़ीब निकाली हम ने
बात बिगड़ी हुई कुछ ऐसे सँभाली हम ने

उस सेे समझौता किया है उसी की शर्तों पे
जान भी बच गई इज़्ज़त भी बचा ली हम ने

6

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किसी के साए को क़ैद करने का एक तरीक़ा बता रहा हूँ
एक उस के आगे चराग़ रख दे, एक उस के पीछे चराग़ रख दे

मैं दिल की बातों में आ गया और उठा के ले आया उस की पायल
दिमाग़ देता रहा सदाएँ, चराग़ रख दे, चराग़ रख दे

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'तारीक़' शब्द गहरे अंधकार का आभास कराता है, जो शाब्दिक और रूपक दोनों रूपों में होता है। कविता में, यह अक्सर प्रकाश, आशा, या स्पष्टता की अनुपस्थिति का प्रतीक होता है, जिससे एक गंभीर और आत्मविश्लेषी माहौल बनता है।

'तारीक़' का उपयोग कवि भावनात्मक शून्यता या अस्तित्वगत संकट को दर्शाने के लिए करते हैं। यह प्रकाश और आशा के शब्दों के विपरीत होता है, जिससे निराशा या आत्मविश्लेषण की गहराई बढ़ती है।

'तारीक़' की छाया में, कवि मानव आत्मा की गहराइयों की खोज के लिए एक कैनवास पाते हैं।