Meaning of

तवाफ़

tawaaf • بے پیرہن

परिक्रमा; किसी पवित्र वस्तु के चारों ओर घूमना

circumambulation; ritual walking around a sacred object

طواف; مقدس چیز کے گرد چکر لگانا

Arabic

दिया है हुक्म ग़मों ने तमाम उम्र शजर
तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-लब क़हक़हे नहीं करेंगे

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हरारत कर कोई, मैं तेरे दिल में घर बना लूँ फिर
तेरी आँखें, तेरी मुस्कान, तेरा दिल संवारूँ फिर

कभी बे पैरहन जब तू मेरे आग़ोश में आए
गले लग कर मैं, तेरे जिस्म का नक़्शा उतारूँ फिर

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ये काम ज़ाहिदों के मैं ख़िलाफ़ कर रहा हूँ
सनम के घर का मुसलसल तवाफ़ कर रहा हूँ

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तवाफ-ए-खाना-ए-काबा है मोमिनों के लिए
तवाफ-ए-तुर्बत-ए-मजनू करो गर आशिक़ हो

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हमराह मेरे तुर्बत-ए-लैला-ओ-कैस का
आओ चलो तवाफ़ करो तुम मता-ए-जाँ

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मसरूफ़ हैं तवाफ़ में भँवरे यूँँ फूल के
जैसे तवाफ़-ए-फूल तवाफ़-ए-क़ुदूम हो

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जो दरमियान है दोनों के साफ़ करना है
किया है इश्क़ तो फिर एतिराफ़ करना है

पहुँच के कूचे में महबूब के शजर मैं ने
तमाम रात ही घर का तवाफ़ करना है

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तुम्हारी शान में पढ़ता है दिल क़सीदे मेरा
तुम्हारे हुस्न का नज़रें तवाफ़ करती हैं

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दिया है हुक्म ग़मों ने तमाम उम्र शजर
तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-लब क़हक़हे नहीं करेंगे

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हरारत कर कोई, मैं तेरे दिल में घर बना लूँ फिर
तेरी आँखें, तेरी मुस्कान, तेरा दिल संवारूँ फिर

कभी बे पैरहन जब तू मेरे आग़ोश में आए
गले लग कर मैं, तेरे जिस्म का नक़्शा उतारूँ फिर

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मूल रूप में, 'तवाफ़' का अर्थ है किसी पवित्र वस्तु के चारों ओर घूमना, जो श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण होता है। कविता में, यह अक्सर प्रिय के चारों ओर आत्मा की यात्रा का प्रतीक होता है, जो भक्ति और लालसा के सार को पकड़ता है।

'तवाफ़' का उपयोग कवि प्रेमी की प्रिय के चारों ओर अनंत यात्रा को दर्शाने के लिए करते हैं। यह भक्ति, आध्यात्मिक लालसा और प्रेम के चक्रीय स्वभाव की छवियों को उभारता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'तवाफ़' प्रेम और भक्ति के अनंत नृत्य का रूपक बन जाता है, एक यात्रा जो कभी समाप्त नहीं होती।