Meaning of

उफ़क़

ufq • افق

क्षितिज; सीमा

horizon; boundary

افق; حد

Arabic

मुनाफ़िक और मुशरिक में कहीं अफ़ज़ल नहीं कोई
यहाँँ तो शहर हैं लेकिन इधर जंगल नहीं कोई

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मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है

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फूटने वाली है मज़दूर के माथे से किरन
सुर्ख़ परचम उफ़ुक़-ए-सुब्ह पे लहराते हैं

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मुताबिक़ मैं हवा के आज चल के जा रहा हूँ अब
ख़बर क्या ये हवा कल भी मुवाफ़िक़ चल सकेगी क्या

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मुनाफ़िक़ के चेले किए जा रहे हैं
अजब कारना
में किए जा रहे हैं

नमाज़ें तो इनसे अदा हो न पाई
मज़ारों पे सज़दे किए जा रहे हैं

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बस एक बार हो तेरी निगाह मेरी तरफ़
फिर उस के बा'द मुझे कोई शै नहीं दरकार

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ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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माचिस की तीली की मुआफ़िक़ सर पे आग लिए फिरता हूँ
आग लगानी है दुनिया को इतना हूँ बेताब समझ लो

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बन जाते हैं अपनी ग़रज़ की ख़ातिर आशिक़ लोग
मेरी नज़र में हैं कुछ ऐसे भी मुनाफिक़ लोग

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मुनाफि़कों की बहुत ही तवील थी फहरिस्त
जो उस को परखा तो इक नाम और उभर आया

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मुनाफ़िक और मुशरिक में कहीं अफ़ज़ल नहीं कोई
यहाँँ तो शहर हैं लेकिन इधर जंगल नहीं कोई

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मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है

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‘उफ़क़’ शब्द उस दूरस्थ रेखा को जागृत करता है जहाँ पृथ्वी आकाश से मिलती है, अनंत संभावनाओं और अप्राप्य सपनों का स्थान। कविता में, यह मानव दृष्टि की सीमाओं और उन्हें पार करने की लालसा का प्रतीक है।

कवि 'उफ़क़' का उपयोग लालसा और आकांक्षा के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर ज्ञात और अज्ञात, ठोस और अलौकिक के बीच की सीमा का प्रतिनिधित्व करता है। यह सपनों की खोज के लिए एक रूपक है।

‘उफ़क़’ के विशाल विस्तार में, कवि अपने सपनों और इच्छाओं के लिए एक कैनवास पाते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो आत्मा को दृश्य से परे भटकने के लिए आमंत्रित करता है।