Meaning of

उल्फ़ते

ulfate • الفت

प्रेम; स्नेह; लगाव

love; affection; fondness

محبت; الفت; لگاؤ

Arabic

बे-वफ़ा से न कर मुहब्बत तू
है ये मुमकिन तो कर बग़ावत तू

एक दिन तुझ को छोड़ जाएगा
कर ले कमज़ोर अपनी उल्फ़त तू

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

77

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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है
फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है

सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं
बस इक लड़की का बोसा लौटाना है

60

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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

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खूब पहचान लो असरार हूँ मैं
जिंस ए उल्फ़त का तलबगार हूँ मैं

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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए

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ये यक़ीं है की मेरी उल्फ़त का
होगा उन पर असर कभी न कभी

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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे

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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

21

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ये जो लोग इतनी उल्फ़त बरसाते हैं
इतने पत्थर साथ कहाँ से लाते हैं

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बे-वफ़ा से न कर मुहब्बत तू
है ये मुमकिन तो कर बग़ावत तू

एक दिन तुझ को छोड़ जाएगा
कर ले कमज़ोर अपनी उल्फ़त तू

15

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

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उल्फ़ते मानव संबंधों की गर्मजोशी और कोमलता को पकड़ता है। यह वह कोमल बंधन है जो दिलों को जोड़ता है, अक्सर अनकहा लेकिन गहराई से महसूस किया जाता है।

कवि उल्फ़ते का उपयोग प्रेम की बारीकियों का अन्वेषण करने के लिए करते हैं, इसकी कोमल शुरुआत से लेकर इसकी गहरी गहराई तक। यह अक्सर अलगाव के दर्द के विपरीत होता है।

उल्फ़ते दिल की मौन भाषा है, बिना शब्दों के बहुत कुछ कहती है।