Meaning of

वक्त़

waqt • وقت

समय; क्षण; युग

time; moment; era

وقت; لمحہ; دور

Arabic

हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है

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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो

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आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने
मैं ने दिल की किताब के पन्ने

वक़्त ने देख मोड़ रक्खे हैं
तेरे हुस्नो शबाब के पन्ने

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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें
अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा

71

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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी
वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए

62

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उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले
जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते

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ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं
बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं

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बिछड़ते वक़्त ये वा'दा किया उस ने
कि बेटी का मुहब्बत नाम रक्खेगी

56

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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन
में
रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?

54

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वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी
दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी

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हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है

53

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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो

144

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मूल रूप से 'वक्त' समय के प्रवाह को दर्शाता है, जो अस्तित्व को नियंत्रित करता है। कविता में, यह जीवन की क्षणभंगुरता, अनुभवों को परिभाषित करने वाले क्षणों और भाग्य को आकार देने वाले युगों की खोज का माध्यम बन जाता है।

'वक्त' का उपयोग कवि अक्सर परिवर्तन की अनिवार्यता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आनंद की क्षणभंगुरता, दुःख की स्थायित्व, या नई शुरुआत की आशा का प्रतीक हो सकता है। अनंतता के विपरीत, यह वर्तमान की मूल्यवानता को उजागर करता है।

'वक्त' जीवन की क्षणभंगुरता की याद दिलाता है, हमें हर क्षण को संजोने के लिए प्रेरित करता है। कविता में, यह एक शाश्वत प्रेरणा बन जाता है।