दिन हमारे सँवर गए होते
हदस गर हम गुज़र गए होते
जीने में कुछ मज़ा नहीं है अब
इस से अच्छा तो मर गए होते
आज पछता रहे न होते हम
काश कल जो सुधर गए होते
पास तस्वीर जो न होती तिरी
हिज्र में कब के मर गए होते
शाइरी गर सँभालती न तो हम
ग़म के मारे किधर गए होते
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