chand KHvaabon ke ata kar ke ujaale mujh ko | चंद ख़्वाबों के अता कर के उजाले मुझ को

  - Naeem Akhtar Khadimi

चंद ख़्वाबों के अता कर के उजाले मुझ को
कर दिया वक़्त ने दुनिया के हवाले मुझ को

जिन को सूरज मेरी चौखट से मिला करता था
अब वो ख़ैरात में देते हैं उजाले मुझ को

मैं हूँ कमज़ोर मगर इतना भी कमज़ोर नहीं
टूट जाए न कहीं तोड़ने वाले मुझ को

और भी लोग मेरे साथ सफ़र करते हैं
कर न देना किसी मंज़िल के हवाले मुझ को

ये मेरी क़ब्र मेरा आख़िरी मस्कन है 'नईम'
किस में दम है जो मेरे घर से निकाले मुझ को

  - Naeem Akhtar Khadimi

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