बना लेता है वो ख़ुशबू कि जब करता है मन उस का
उसी के फूल हैं ये तितलियाँ उस की चमन उस का
न जाने कब क़रार आएगा मेरी उँगलियों को दोस्त
न जाने कब मिलेगा मुझ को छूने को बदन उस का
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