तुझको ख़ुशी भी परोसी मिली
    बिखरा मिरा ये जहाँ रह गया
    jaani Aggarwal taak
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    तिरी खुशियाँ तुझे हर दम मुबारक
    हमें तो बस हमारा ग़म मुबारक
    jaani Aggarwal taak
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    अब इरादा वस्ल का बाक़ी नहीं
    फ़ुर्क़तों में उम्र सारी लग गयी
    jaani Aggarwal taak
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    कभी तन्हाई से निकला बड़ी मुश्किल से लेकिन
    हवाले हिज्र के मैं फिर दुबारा हो गया हूँ
    jaani Aggarwal taak
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    मुहब्बत से नफ़रत सी होने लगी है
    किया हश्र ऐसा हमारा किसी ने
    jaani Aggarwal taak
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    कभी मीठा हुआ करता था इस दरिया का पानी
    बिना तेरे समंदर जैसा खारा हो गया हूँ
    jaani Aggarwal taak
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    मुहब्बत जान लेती है सुना अब तक यही था
    मगर मैं तो जहाँ में मारा मारा हो गया हूँ
    jaani Aggarwal taak
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    अब मैं मुहब्बत करूँगा नहीं,
    अब इश्क़ सच्चा कहाँ रह गया
    jaani Aggarwal taak
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    है परेशानी मगर अब क्या करें,
    रास्ते में हैं ख़बर अब क्या करें

    घर पे बैठी कर रही वो इंतिजार
    हो रही बेचैन पर अब क्या करें
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    jaani Aggarwal taak
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    हमको भी अब इक बिमारी लग गयी
    जबसे ये आदत तुम्हारी लग गयी

    ख़ूबसूरत इक दफा जो कह दिया
    जान तुमपे पहरेदारी लग गयी
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    jaani Aggarwal taak
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