jaani Aggarwal taak

jaani Aggarwal taak

@Jaaniaggarwaltaak9205

jaani Aggarwal taak shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in jaani Aggarwal taak's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
बना तुमको समंदर मैं किनारा हो गया हूँ
मिरे तुम हो नहीं पर मैं तुम्हारा हो गया हूँ
jaani Aggarwal taak
हवाओं की तरह घेरे रहोगे तुम
भला हम से जुदा कैसे रहोगे तुम

ये पहली मर्तबा मैं जान पाया हूँ
हमेशा ज़ख़्म इक गहरे रहोगे तुम
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jaani Aggarwal taak
तिरे उम्र भर का फ़िराक़ ये मिरे दो पलों की ख़ुराक है
तिरी ज़िन्दगी है तबाह तो मिरी ज़िन्दगी भी तो ख़ाक है
jaani Aggarwal taak
मेरे दिल को हलाल कर रोना
मेरी इज़्ज़त उछाल कर रोना

देखना चाहता हूँ मरते वक़्त
आँखों में आँखें डाल कर रोना
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jaani Aggarwal taak
न जाने तुमने कितने घर उजाड़े काट के जंगल
किसी को कर के बे घर कैसे घर अपना बनाते हो
jaani Aggarwal taak
वो यूँ गया कि कुम्भ के मेले में खो गया
इक मैं था उसके बाद जो कमरे में खो गया
jaani Aggarwal taak
जब से तन्हा हम हो गए
कितने सारे ग़म हो गए

आँख से तो सब रोते हैं
ज़ख़्म हमारे नम हो गए
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jaani Aggarwal taak
मुझमें कोई बावफ़ा रह गया
इक़ ज़ख़्म था जो हरा रह गया

होठों से तो मुस्कुराते रहे
आँखों में पानी भरा रह गया
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jaani Aggarwal taak
दिलकशों से न दिल्लगी होगी
एक के नाम ज़िन्दगी होगी

हर दफ़ा सोचता हूँ क्या वो भी
मेरे जैसा ही सोचती होगी
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jaani Aggarwal taak
मैंने सहरा की प्यास देखी है
उसकी आँखें उदास देखी है

और तो कुछ नहीं किया हमने
हाँ मगर उसकी आस देखी है
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jaani Aggarwal taak
दर्द अपना तुम्हें सुनाऊँ क्या
एक आँसू नहीं बहाऊँ क्या

बाँह में बाँह डाले बैठे थे
ऐसा इक झूठ था बताऊँ क्या
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jaani Aggarwal taak
ख़ुशियों से भी मेरा पाला पड़ रक्खा
ग़म की हर सौग़ात समझ में आती है
jaani Aggarwal taak
किस की क्या औक़ात समझ में आती है
अब मुझ को हर बात समझ में आती है
jaani Aggarwal taak
मयकशी ख़ुद-कुशी से बेहतर है
मौत भी ज़िन्दगी से बेहतर है

वक़्त पड़ने पे आज़मा के देख
दुश्मनी दोस्ती से बेहतर है
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jaani Aggarwal taak
जताता हूँ कि जैसे मैं सभी ग़म भूल जाऊँगा
मुझे लगता नहीं ऐसा कभी ग़म भूल जाऊँगा

वो लौट आए मिरी इस ज़िन्दगी में चाहे जैसे भी
क़सम खाकर के कहता हूँ अभी ग़म भूल जाऊँगा
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jaani Aggarwal taak
दोस्ती दुश्मनी दग़ा-बाज़ी
ज़िन्दगी खेल है लगा बाज़ी

ख़ुद कमाने लगोगे तब जाकर
सब निकल जाएगी हवा-बाज़ी
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jaani Aggarwal taak
चंद लफ़्ज़ों ने बाँध रक्खा है
और वो ये तुम्हें क़सम मेरी
jaani Aggarwal taak
ज़माने भर को तंग रखना है
तुझे यूँ संग संग रखना है
jaani Aggarwal taak
जाने क्यों मौत ये नहीं आती
कब तलक़ जी के मैं सज़ा काटूँ
jaani Aggarwal taak
कौन जाने कि अब कहाँ हो तुम
ऐसा लगता है दरमियाँ हो तुम

एक मुद्दत निकल गई देखे
जाने जाँ अब तलक जवाँ हो तुम
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