हवाओं की तरह घेरे रहोगे तुमभला हम से जुदा कैसे रहोगे तुमये पहली मर्तबा मैं जान पाया हूँहमेशा ज़ख़्म इक गहरे रहोगे तुम— jaani Aggarwal taak