Manish jain

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Manish jain shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Manish jain's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मेरे हिज्र में कोई रस्म ही न हुई थी अश्क बहाने की यूँँ ही उस के माथे को चूम, हल्के से उस को कह दिया अलविदा — Manish jain
मैं ने बहता पानी देखा और समझा चाहे जितना रोको रुकता कुछ नहीं है — Manish jain
दर्द लफ़्ज़ों से बयाँ है हो रहा याँ और तुम कहते हो अच्छा शे'र है वाह — Manish jain
उड़ता चला गया एक परिंदा मेरी शाख़ों से हो सकता है मुझ सेे बेहतर शजर नज़र आया है — Manish jain
हाल और क्या ही होता मेरा मोहब्बत बा'द वो ही होता जो होता शहर का क़यामत बा'द — Manish jain
ज़िन्दगी बस इसी इक सोच में कटती है अब फ़िक्र कैसे कोई, मुझ सी तेरी कर पाएगा — Manish jain
मैं मुब्तला-ए-इश्क़ में अब दर-बदर होने को हूँ या'नी सिला मिल ही गया मुझ को मेरी नादानी का — Manish jain
इक तेरे आने के भरोसे पर हूँ अब तक मुस्तक़िल वर्ना हो जाता, आशिक़ी में, इक सबब क़ुर्बानी का — Manish jain
रोज़ अपनी बेबसी का एक मंज़र ले उठा हूँ होता है मौजूद हर इक शख़्स, बस तेरे अलावा — Manish jain
ज़ख़्म ये पायाब है पर दर्द गहरे हैं मेरे मुस्कुराता ग़म मेरा अश्कों से नाते हैं मेरे — Manish jain
ग़म परेशानी, मोहब्बत, और तमन्ना छोड़ दें सब ज़िंदगी तू ये बता और कितने दिन बाक़ी हैं मेरे — Manish jain
तस्वीरें कुछ तेरी लगाई मैं ने कमरे में मेरे और लोग कहते लड़का बातें कर रहा दीवारों से — Manish jain
पूरी रात मैं क़लम लिए ये सोचता रहा कैसे इक ग़ज़ल में सारा-सारा लिख दें अब तुम्हें — Manish jain
हम को हर एक रात जलानी फ़िराक़ में क्या रस्म-ए-दूरी यूँँ ही निभानी फ़िराक़ में — Manish jain
भला पत्थर से कब दिल टूटते देखें दिलों को तो मोहब्बत तोड़ देती है — Manish jain
मुकर्रर नहीं अश्क-बारी का मौसम यहाँ दिल बिखरते ही हो जाती बरसात — Manish jain
तुम्हें मुझ सेे अगर शिकवा रहा, कुछ कहना मत मुझ सेे मोहब्बत में हूँ जानाँ, मैं तुम्हारी आँखें पढ़ लूँगा — Manish jain
रूह, साँसें, दिल ये बातें इश्क़ की, मत करना मुझ सेे दर्द की मुझ सेे करो बातें, इलाका ये हैं मेरा — Manish jain
मेरे हक़ में फ़ैसला हो ये ज़रूरी तो नहीं मामला चाहे जो जीतें ख़ुश रखें तुम को ख़ुदा — Manish jain

Ghazal

सर्द रातें तेरी यादें और इक तस्वीर है जान तू नहीं क़िस्मत में तो क्या, तू ही हीर है जान तेरे ख़त, मैसेज, पायल रक्खे है सँभाल कर याँ अब कमाना कुछ नहीं है, ये मेरी जागीर है जान जो कबूतर बैठा खिड़की पर उसे तुम मत उड़ाना वो तों मेरी तुम सेे बातें करने की तदबीर है जान तुम कहो आज़ाद कर दूँ, ख़ुद को अब इस क़फ़स से तो करूँँ कैसे, तेरे ही इश्क़ की ज़ंजीर है जान रोज़ मुझ सेे कहती हों कुछ अपना लिक्खा ही सुना दो लगता आशिक़ अपना क्या तुम को कोई मीर है जान क्या कहा था तुम ने, मिलने एक दिन आओगी मुझ सेे आज छुट्टी है आ जाओ तुम तो, कल फिर पीर है जान — Manish jain