Nainsee Gupta 'Nayantara'

Nainsee Gupta 'Nayantara'

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Nainsee Gupta 'Nayantara' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nainsee Gupta 'Nayantara''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

जगमगाती रौशनी के पीछे भी है इक अँधेरा बोलो ना ये देख चेहरा ज़िंदगी देखी नहीं है — Nainsee Gupta 'Nayantara'
प्रेम ने थामा है जब से ज़िंदगी खिल सी गई है शब्द भी सब मौन तब से ध्यान भी ख़ुद घट रहा है — Nainsee Gupta 'Nayantara'
देवता कोई नहीं पर दिल बनाया प्रेम मंदिर बैठ मंदिर में अकेले ख़ुद को पूजे जा रहे हैं — Nainsee Gupta 'Nayantara'
न आए सामने उस के कभी भी आईना कोई कि धड़कन में बसा जो है रहे आबाद दिल उस का — Nainsee Gupta 'Nayantara'
पोंछता है कौन ही आँसू किसी के ज़िंदगी कहती है समझो मुस्कुराओ — Nainsee Gupta 'Nayantara'
नज़र के सामने है खोजती जिस को नज़र तेरी ज़रा ख़ुद को जगाओ और बोलो देखने को सच — Nainsee Gupta 'Nayantara'
अपना हुआ करता कभी वो लग रहा है अजनबी — Nainsee Gupta 'Nayantara'
कौन है किस का यहाँ गर देखना है तुम को तो बस मुस्कुराते मुस्कुराते सुनते जाओ बात हर इक — Nainsee Gupta 'Nayantara'
हाथ पकड़ा पास बैठा फिर कहा तुम मेरी हो बस हाए हो जाए हक़ीक़त ख़्वाब जो ये कल दिखा था — Nainsee Gupta 'Nayantara'
लो वक़्त बदला अब कहाँ शैतान से डरता है मन इंसान के अंदर छिपे हैवान से डरता है मन — Nainsee Gupta 'Nayantara'
है देखना अगर तो देख आइना कि यूँँ हमें न देख तू तमाशा-बीं — Nainsee Gupta 'Nayantara'
नहीं की दोस्ती मैं ने किसी गुल से सितारों से कि हिस्से जो मिरे आए सभी वो दोस्त मुझ में थे — Nainsee Gupta 'Nayantara'
जिन को रौशन ज़िंदगी भाती नहीं है तितलियों की उन के हाथों पर न बैठे तितलियाँ आ कर कभी भी — Nainsee Gupta 'Nayantara'
हटाया आँख से चश्मा पुराना तो ये जाना है कि मेरा क्या भला मुझ में है जो सब कुछ तुम्हारा है — Nainsee Gupta 'Nayantara'
हैं उभरे ज़ख़्म ये गहरे तेरे दिल के मेरे दिल पर न होकर साथ कुछ यूँँ ही रहे हैं साथ हम दोनों — Nainsee Gupta 'Nayantara'
ढूँढ़ने में तुम को ख़ुद को खोने वाले मुस्कुराते ही मिलेंगे रोने वाले — Nainsee Gupta 'Nayantara'
बन बेमुरव्वत मन के मालिक फिर रहे हैं दर-ब-दर बेहतर ठिकाना पास है कह के गए थे जो मुझे — Nainsee Gupta 'Nayantara'
हसरतें सब हैं पड़ी बिखरी यहीं खोजते जिस को भटकते फिर रहे — Nainsee Gupta 'Nayantara'
आदमी देख कर डर रहा आदमी कौन था जानता ऐसा होगा कभी — Nainsee Gupta 'Nayantara'
जुर्म गुमनाम होकर भी बदनाम है जाने कैसी सज़ा मिल रही है उसे — Nainsee Gupta 'Nayantara'

Ghazal