ये दर्द के टुकड़े हैँ अश'आर नहीं अज़रा
हम लफ़्ज़ों के धागों में ज़ख़्मों को पिरोते हैँ
हम लफ़्ज़ों के धागों में ज़ख़्मों को पिरोते हैँ
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तुझ को पाकर भी कुछ नहीं पाया
तेरे हो के भी बे-सहारे हैं
तेरे हो के भी बे-सहारे हैं
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तुम मेरे ज़ेहन से उतर जाओ
मैं तुम्हें उम्र भर दुआ दूँगी
मैं तुम्हें उम्र भर दुआ दूँगी
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