Binte Reshma

Binte Reshma

@azzuan4014111

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  • Sher

Sher

हम हैं वो लोग कि आग़ोश न कांधा कोई गोलियाँ नींद की खाते हैं सुकूॅं पाने को — Binte Reshma
नज़र चुरा के कहा बस यही मुक़द्दर था बिछड़ने वाले ने मलबा ख़ुदा पे डाल दिया — Binte Reshma
किसी बाज़ार से जो मिल जाता अपना बचपन ख़रीद लाते फिर — Binte Reshma
आँखों को अब समझाना होगा ख़्वाबों की तकमील नहीं होती — Binte Reshma
हार जाने पे लोग कहते हैं कौन झगड़ा करे मुक़द्दर से — Binte Reshma
तुझ को पाकर भी कुछ नहीं पाया तेरे हो के भी बे-सहारे हैं — Binte Reshma
तुम मेरे ज़ेहन से उतर जाओ मैं तुम्हें उम्र भर दुआ दूँगी — Binte Reshma
तुम सेे सौदा हुआ था लम्हों का तुम ने सदियाँ उदास कर डालीं — Binte Reshma
डूबने वाला तो कुछ देर में डूबेगा मगर डूबता देखने वालों को बड़ी जल्दी है — Binte Reshma
राब्ते ख़त्म कर लिए सब सेे अब मुझे अपने साथ रहना है — Binte Reshma
सौ बार जिस को देख के हैरान हो चुके दिल चाहता है फिर उसे इक बार देखना — Binte Reshma
यूँँ तो समेट लाई थी हर चीज़ गाँव से धागे तुम्हारे नाम के बरगद पे रह गए — Binte Reshma
कौन देगा सुकून आँखों को किस को देखें कि नींद आ जाए — Binte Reshma
ये दर्द के टुकड़े हैँ अश'आर नहीं अज़रा हम लफ़्ज़ों के धागों में ज़ख़्मों को पिरोते हैँ — Binte Reshma
अब लग चुकी है दर्द के मौसम की लत मुझे अब देर हो चुकी है बहुत रोक मत मुझे — Binte Reshma
एक साया है घने पेड़ का मेरे सर पर एक आँचल से मुझे ठंडी हवा आती है — Binte Reshma