Binte Reshma

Binte Reshma

@azzuan4014111

AzraGhalib shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in AzraGhalib's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher

हम हैं वो लोग कि आग़ोश न कांधा कोई
गोलियाँ नींद की खाते हैं सुकूॅं पाने को

Binte Reshma

डूबने वाला तो कुछ देर में डूबेगा मगर
डूबता देखने वालों को बड़ी जल्दी है

Binte Reshma

इश्क़ में नाम कमाते हैं तो रब जाता है
पीछे हटते हैं तो पुरखों का नसब जाता है

धीमी आवाज़ पे धरता ही नहीं कान कोई
तैश में आएँ तो लहजे से अदब जाता है

Binte Reshma

राब्ते ख़त्म कर लिए सबसे
अब मुझे अपने साथ रहना है

Binte Reshma

नज़र चुरा के कहा बस यही मुक़द्दर था
बिछड़ने वाले ने मलबा ख़ुदा पे डाल दिया

Binte Reshma

सौ बार जिसको देख के हैरान हो चुके
दिल चाहता है फिर उसे इक बार देखना

Binte Reshma

किसी बाज़ार से जो मिल जाता
अपना बचपन ख़रीद लाते फिर

Binte Reshma

यूँ तो समेट लाई थी हर चीज़ गाँव से
धागे तुम्हारे नाम के बरगद पे रह गए

Binte Reshma

आँखों को अब समझाना होगा
ख़्वाबों की तकमील नहीं होती

Binte Reshma

कौन देगा सुकून आँखों को
किस को देखें कि नींद आ जाए

Binte Reshma

हार जाने पे लोग कहते हैं
कौन झगड़ा करे मुक़द्दर से

Binte Reshma

ये दर्द के टुकड़े हैँ अशआर नहीं अज़रा
हम लफ़्ज़ों के धागों में ज़ख्मों को पिरोते हैँ

Binte Reshma

तुझको पाकर भी कुछ नहीं पाया
तेरे होके भी बे-सहारे हैं

Binte Reshma

अब लग चुकी है दर्द के मौसम की लत मुझे
अब देर हो चुकी है बहुत रोक मत मुझे

Binte Reshma

तुम मेरे ज़ेहन से उतर जाओ
मैं तुम्हें उम्र भर दुआ दूँगी

Binte Reshma

एक साया है घने पेड़ का मेरे सर पर
एक आँचल से मुझे ठंडी हवा आती है

Binte Reshma

तुमसे सौदा हुआ था लम्हों का
तुमने सदियाँ उदास कर डालीं

Binte Reshma