Ehtisham Saami

Ehtisham Saami

@ehtisham_saami

Ehtisham Saami shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ehtisham Saami's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

पहना है जब से हम ने लिबास-ए-मुनाफ़िक़त लोगों में उठना बैठना आसान हो गया — Ehtisham Saami

Ghazal

अंधे बने रहे तो सभी दीदा-वर मिले आँखें खुलीं तो दहर में अंधे नगर मिले ​तूफ़ान से लड़े थे अकेले ही उम्र भर साहिल पे आ गए तो हमें हम-सफ़र मिले ​बदला मिज़ाज-ए-वक़्त तो रिश्ते बदल गए मौसम बदल गया तो नए बाल-ओ-पर मिले ​था सोज़-ए-दिल उरूज़ पे बरहम था बख़्त भी अच्छा हुआ कि राह में तुम मुख़्तसर मिले ​पैदा हुआ है कौन यहाँ अपनी चाह से मिट्टी को क्यों गिला हो जो मिट्टी का घर मिले ​वक़्त-ए-रवाँ के पास नहीं मोहलत-ए-सुकूँ ज़र्रे को आरज़ू है कि शम्स-ओ-क़मर मिले ​'सामी' जिए तो अपनी ही मौज-ए-नुमू में हम एहसान-ए-नाख़ुदा न हमें उम्र भर मिले — Ehtisham Saami