Farah Iqbal

@farah-iqbal

Farah Iqbal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Farah Iqbal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

ख़ता तुम से हुई आख़िर तुम्हारा क्या बिगड़ जाता ये बाज़ी भी तुम्हारी थी अगर मोहरा बदल लेते — Farah Iqbal

Ghazal

सारे मंज़र दिलकश थे हर बात सुहानी लगती थी जीवन की हर शाम हमें तब एक कहानी लगती थी जिस का चाँद सा चेहरा था और ज़ुल्फ़ सुनहरी बादल सी मस्त हवा का आँचल था में एक दिवानी लगती थी अपने ख़्वाब नए लगते थे और फिर उन के आगे सब दुनिया और ज़माने की हर बात पुरानी लगती थी प्यार के मौसम की ख़ुशबू से ग़ुंचा ग़ुंचा महका था महकी महकी दुनिया सारी रात की रानी लगती थी लम्हों के रंगीन ग़ुबारे हाथ से छूटे जाते थे मौसम दुख का दर्द की रुत सब आनी-जानी लगती थी क़ौस-ए-क़ुज़ह की बारिश में ये जज़्बों की मुँह ज़ोर हवा मौज उड़ाते बल खाते दरिया की रवानी लगती थी अब देखें तो दूर कहीं पर यादों की फुलवारी में रंगों से भरपूर फ़ज़ा थी जो ला-फ़ानी लगती थी — Farah Iqbal