Khushbir Singh Shaad

Khushbir Singh Shaad

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Khushbir Singh Shaad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Khushbir Singh Shaad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

अब अँधेरों में जो हम ख़ौफ़-ज़दा बैठे हैं क्या कहें ख़ुद ही चराग़ों को बुझा बैठे हैं — Khushbir Singh Shaad
मुझ को समझ न पाई मिरी ज़िंदगी कभी आसानियाँ मुझी से थीं मुश्किल भी मैं ही था — Khushbir Singh Shaad
रगों में ज़हर-ए-ख़ामोशी उतरने से ज़रा पहले बहुत तड़पी कोई आवाज़ मरने से ज़रा पहले — Khushbir Singh Shaad
ख़ुशियाँ देते देते अक्सर ख़ुद ग़म में मर जाते हैं रेशम बुनने वाले कीड़े रेशम में मर जाते हैं — Khushbir Singh Shaad

Ghazal

रोज़ दिल में हसरतों को जलता बुझता देख कर थक चुका हूँ ज़िंदगी का ये रवैया देख कर रेज़ा रेज़ा कर दिया जिस ने मिरे एहसास को किस क़दर हैरान है वो मुझ को यकजा देख कर क्या यही महदूद पैकर ही हक़ीक़त है मिरी सोचता हूँ दिन ढले अब अपना साया देख कर कुछ तलब में भी इज़ाफ़ा करती हैं महरूमियाँ प्यास का एहसास बढ़ जाता है सहरा देख कर मेरे ख़्वाबों पर भी उस ने नाम अपना लिख लिया अब भी क्यूँँ ख़ामोश हूँ मैं ये तमाशा देख कर सच तो ये है सब को अपनी जान प्यारी है यहाँ उड़ गए सारे परिंदे पेड़ कटता देख कर 'शाद' जाने जी रहे हो कौन सी दुनिया में तुम दुनिया दुनिया कर रहे हो अब भी दुनिया देख कर — Khushbir Singh Shaad
रगों में ज़हर-ए-ख़ामोशी उतरने से ज़रा पहले बहुत तड़पी कोई आवाज़ मरने से ज़रा पहले ज़रा सी बात है कब याद होगी इन हवाओं को मैं इक पैकर था ज़र्रों में बिखरने से ज़रा पहले मैं अश्कों की तरह इस दर्द को भी ज़ब्त कर लेता मुझे आगाह तो करता उभरने से ज़रा पहले कोई सूरज से ये पूछे कि क्या महसूस होता है बुलंदी से नशेबों में उतरने से ज़रा पहले कहीं तस्वीर रुस्वा कर न दे मेरे तसव्वुर को मुसव्विर सोच में है रंग भरने से ज़रा पहले सुना है वक़्त कुछ ख़ुश-रंग लम्हे ले के गुज़रा है मुझे भी 'शाद' कर जाता गुज़रने से ज़रा पहले — Khushbir Singh Shaad