Kumar Pashi

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@kumar-pashi

Kumar Pashi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kumar Pashi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

कोई तो ढूँड के मुझ को कहीं से ले आए कि ख़ुद को देखा नहीं है बहुत ज़मानों से — Kumar Pashi
कुछ ग़ज़लें उन ज़ुल्फ़ों पर हैं कुछ ग़ज़लें उन आँखों पर जाने वाले दोस्त की अब इक यही निशानी बाक़ी है — Kumar Pashi
ओढ़ लिया है मैं ने लिबादा शीशे का अब मुझ को किसी पत्थर से टकराने दो — Kumar Pashi
जब खिले फूल चमन में तो तिरी याद आई चंद आँसू भी मसर्रत के बहाने निकले — Kumar Pashi

Ghazal

एक कहानी ख़त्म हुई है एक कहानी बाक़ी है मैं बे-शक मिस्मार हूँ लेकिन मेरा सानी बाक़ी है दश्त-ए-जुनूँ की ख़ाक उड़ाने वालों की हिम्मत देखो टूट चुके हैं अंदर से लेकिन मन-मानी बाक़ी है हाथ मिरे पतवार बने हैं और लहरें कश्ती मेरी ज़ोर हवा का क़ाएम है दरिया की रवानी बाक़ी है गाहे गाहे अब भी चले जाते हैं हम उस कूचे में ज़ेहन बुज़ुर्गी ओढ़ चुका दिल की नादानी बाक़ी है कुछ ग़ज़लें उन ज़ुल्फ़ों पर हैं कुछ ग़ज़लें उन आँखों पर जाने वाले दोस्त की अब इक यही निशानी बाक़ी है नई नई आवाज़ें उभरीं 'पाशी' और फिर डूब गईं शहर-ए-सुख़न में लेकिन इक आवाज़ पुरानी बाक़ी है — Kumar Pashi