जला कर दिल उजाला हो गया क्या
    मेरा ज़र्रा सितारा हो गया क्या

    नई चीज़ों को घर में रखने वाले
    मैं कुछ ज़्यादा पुराना हो गया क्या

    घरों से भागने वाले बताएँ
    मोहब्बत से गुज़ारा हो गया क्या
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    Kushal Dauneria
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    यहाँ तुम देखना रुतबा हमारा
    हमारी रेत है दरिया हमारा
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    सारे का सारा तो मेरा भी नहीं
    और वो शख़्स बेवफ़ा भी नहीं

    ग़ौर से देखने पे बोली है
    शादी से पहले सोचना भी नहीं
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    छोड़ कर जाने का दस्तूर नहीं होता था
    कोई भी ज़ख़्म हो नासूर नहीं होता था

    मेरे भी होंठ पे सिगरेट नहीं होती थी
    उसकी भी माँग में सिंदूर नहीं होता था

    औरतें प्यार में तब शौक़ नहीं रखती थी
    आदमी इश्क़ में मज़दूर नहीं होता था
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    चल गया होगा पता ये आपको
    बेवफ़ा कहते हैं लड़के आपको

    इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़
    तू समझती क्या है अपने आपको
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    यहाँ तुम देखना रुतबा हमारा
    हमारी रेत है दरिया हमारा

    किसी से कल पिताजी कह रहे थे
    मुहब्बत खा गई लड़का हमारा

    तअ'ल्लुक़ ख़त्म करने जा रही है
    कहीं गिरवा न दे बच्चा हमारा
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    कि तेरे बाद भी ज़िंदा हूॅं मैं मरा तो नहीं
    हसीन है तू मेरी जाॅं मगर ख़ुदा तो नहीं

    वो लाल रंग बड़ा खिल रहा था तुझ पर कल
    तू रात आग लगाते हुए जला तो नहीं

    बुलंदियों के वरक़ पर कुशल कहीं तू ने
    उसे बनाने में ख़ुद को मिटा दिया तो नहीं
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    जहाँ-जहाँ पे तुझे ग़ैर ने छुआ हुआ था
    वहाँ-वहाँ पे मेरा जिस्म भी जला हुआ था

    शिकस्त होनी थी ये मेरा पहला इश्क़ था और
    वो बेवफ़ा यही करते हुए बड़ा हुआ था

    फिर एक रोज़ मुझे ये पता लगा उसके
    पुराने आशिक़ों के साथ भी बुरा हुआ था

    पिता के कहने से लड़की ने घर बसा लिया पर
    माॅं इस कहानी में लड़के के साथ क्या हुआ था
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    तारीख़ आ गयी है उधर कार्ड छप गए
    अब कब कहेगी तुझको वो लड़का नही पसंद
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    या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
    गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

    वो शख़्स सालों बाद भी कितना हसीन है
    वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
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    Kushal Dauneria
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