कि तेरे बा'द भी ज़िंदा हूँ मैं मरा तो नहीं
हसीन है तू मेरी जाॅं मगर ख़ुदा तो नहीं
वो लाल रंग बड़ा खिल रहा था तुझ पर कल
तू रात आग लगाते हुए जला तो नहीं
बुलंदियों के वरक़ पर कुशल कहीं तू ने
उसे बनाने में ख़ुद को मिटा दिया तो नहीं
— Kushal Dauneria
हसीन है तू मेरी जाॅं मगर ख़ुदा तो नहीं
वो लाल रंग बड़ा खिल रहा था तुझ पर कल
तू रात आग लगाते हुए जला तो नहीं
बुलंदियों के वरक़ पर कुशल कहीं तू ने
उसे बनाने में ख़ुद को मिटा दिया तो नहीं
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