जो भी अफ़वाह था वो सच निकला
शोर मचना था शोर मच निकला
छिप गई बात हाथ कटने की
ख़ून मेहँदी के साथ रच निकला
दुख तो ये है कि तेरे बारे में
जहाँ से जो सुना वो सच निकला
सोचता हूँ वो ऐन मौक़े पर
कैसे मेरी हवस से बच निकला
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