पुरानी हो चुकी बेशक किताबें इश्क़ की मेरी
    मगर यादों के पन्ने आज भी महफूज़ रक्खे हैं
    Kushal "PARINDA"
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    मेरी बस शर्त इतनी है तेरे हाथों से पट्टी हो
    तो फिर चाहे ज़माने का कोई भी ज़ख़्म मिल जाए
    Kushal "PARINDA"
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    नहीं जाना कभी उस घर जहाँ इज्ज़त नहीं होती
    बिना माँ-बाप के घर में कभी रहमत नहीं होती
    Kushal "PARINDA"
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    भला तुम कैसे जानोगे मिला है दर्द जो गहरा
    वो जैसे नोचता है बाल अपने नोच कर देखो
    Kushal "PARINDA"
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    "माँ-बाप बिना"
    वो गहना नही जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा।
    वो शक्स नही जो इनके सिवा, हर किसी को पसंद आ जाऊँगा।
    मैं रिश्ते बनाने आया हूँ, कोई सौदा न करके जाऊँगा।
    माँ-बाप से बढ़कर रिश्ता न कोई ये तुम्हे बताकर जाऊँगा।

    वो गहना नही जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा।

    माँ कोख में लेकर चलती है, पिता सोच में लेकर चलते है।
    बच्चों को कोई तकलीफ़ न हो, फर्ज़ों का बोझ उठाकर चलते है।
    अपनी कलम से लिख इनका, गुणगान भी करके जाऊँगा।

    वो गहना नही जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा।

    माँ-बाप के लाड़ प्यार में, डाँट तो बेशक होती है।
    बच्चे कितने भी हो लेकिन, उन्हे फ़िक्र सभी की होती है।
    उनकी इस शिक्षा से मैं, हर मैदान फतेह कर जाऊँगा।

    वो गहना नही जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा।

    कैसे भूलूँ आधीरात में, माँ का गीले से सूखे पर सुलाना।
    कैसे भूलूँ उस बाप को, अपना पेट काट मुझको खिलाना।
    मैं तुम दोनो के बलिदान का, कभी कर्ज चुका न पाऊँगा।

    वो गहना नही जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा।

    उन बच्चों के भी क्या कहने, जो माँ-बाप से अलग हो जाते है।
    उनसे कोई तकलीफ़ न हो, वृद्ध आश्रम छोड़कर जाते है।
    रब्ब बोले ऐसी औलाद को, कभी माफ़ न मैं कर पाऊँगा।

    वो गहना नही जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा।
    वो शक्स नही जो इनके सिवा, हर किसी को पसंद आ जाऊँगा।
    मैं रिश्ते बनाने आया हूँ, कोई सौदा न करके जाऊँगा।
    माँ-बाप से बढ़कर रिश्ता न कोई ये तुम्हे बताकर जाऊँगा।
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    Kushal "PARINDA"
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    वो तुमसे दूर कैसा है ये तुम भी सोच कर देखो
    वो जैसे नोचता है बाल तुम भी नोच कर देखो
    Kushal "PARINDA"
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    इसी उम्मीद से मैं देखता हूँ रास्ता उसका
    वो आएगा ज़मी बंजर में इक दिन घर उगाने को
    Kushal "PARINDA"
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    परेशानी तो है उसको कि मैं अब लौट आया हूँ
    हूँ ज़िन्दा मैं उसे इस बात ने आफ़त में डाला है
    Kushal "PARINDA"
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    लिखा क़िस्मत में जो उसने वही बस हक़ से पाया है
    न पाया हक़ से गर होगा बला देगी यही दुनिया
    Kushal "PARINDA"
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    अगर मैं मर गया मुझको जला देगी यही दुनिया
    किसी के काम भी आया भुला देगी यही दुनिया
    Kushal "PARINDA"
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