Manmohan Talkh

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Manmohan Talkh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Manmohan Talkh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

माँगा जो एक भीड़ ने कल मुझ से रास्ता देखा तो मैं ही राह में बिखरा हुआ मिला — Manmohan Talkh
मैं ख़ुद में गूँजता हूँ बन के तेरा सन्नाटा मुझे न देख मिरी तरह बे-ज़बाँ बन कर — Manmohan Talkh

Ghazal

मैं एक शाम जो लौटा ग़ुबार-ए-जाँ बन कर बिखर के रह गया राहों की दास्ताँ बन कर मैं ख़ुद में गूँजता हूँ बन के तेरा सन्नाटा मुझे न देख मिरी तरह बे-ज़बाँ बन कर मैं अपने आप का वो शोर था तुझे पा कर तुझे डरा दिया आवाज़-ए-बे-अमाँ बन कर हर एक शख़्स है अफ़्वाह आप ही अपनी हर इक को जानता है हर कोई गुमाँ बन कर तमाम सम्तें पलटती सी जान पड़ती हैं पहुँच रहा हूँ कहाँ दर्द-ए-ला-मकाँ बन कर ये किस को ढूँड रहा हूँ मैं एक अर्से से ख़ुद अपना ही कोई भटका हुआ निशाँ बन कर जो ख़ुद थे अपनी सदा का यक़ीं वही तो हैं हम पहाड़ जैसे कोई उड़ गया धुआँ बन कर तू कर के रद्द मुझे ख़ुद को ज़रा क़ुबूल तो कर खड़ा हूँ तेरे लिए एक इम्तिहाँ बन कर ख़ुद अपनी बात का दुख बन के रह न जा ऐ 'तल्ख़' हर एक दिल में समा जा ग़म-ए-जहाँ बन कर — Manmohan Talkh