Miyan Dad Khan Sayyah

Miyan Dad Khan Sayyah

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Miyan Dad Khan Sayyah shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Miyan Dad Khan Sayyah's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो — Miyan Dad Khan Sayyah
तुर्रा-ए-काकुल-ए-पेचाँ रुख़-ए-नूरानी पर चश्मा-ए-आईना में साँप सा लहराता है — Miyan Dad Khan Sayyah

Ghazal

क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो लाल डोरे तिरी आँखों में जो देखे तो खुला मय-ए-गुल-रंग से लबरेज़ हैं पैमाने दो ठहरो तेवरी को चढ़ाए हुए जाते हो किधर दिल का सदक़ा तो अभी सर से उतर जाने दो मना क्यूँ करते हो इश्क़-ए-बुत-ए-शीरीं-लब से क्या मज़े का है ये ग़म दोस्तो ग़म खाने दो हम भी मंज़िल पे पहुंच जाएँगे मरते खपते क़ाफ़िला यारों का जाता है अगर जाने दो एक आलम नज़र आएगा गिरफ़्तार तुम्हें अपने गेसू-ए-रसा ता-ब-कमर जाने दो सख़्त-जानी से मैं आरी हूँ निहायत ऐ 'तल्ख़' पड़ गए हैं तिरी शमशीर में दंदाने दो हश्र में पेश-ए-ख़ुदा फ़ैसला इस का होगा ज़िंदगी में मुझे उस गब्र को तरसाने दो गर मोहब्बत है तो वो मुझ से फिरेगा न कभी ग़म नहीं है मुझे ग़म्माज़ को भड़काने दो वाइ'ज़ों को न करे मनअ' नसीहत से कोई मैं न समझूँगा किसी तरह से समझाने दो रंज देता है जो वो पास न जाओ 'सय्याह' मानो कहने को मिरे दूर करो जाने दो — Miyan Dad Khan Sayyah