Rehana Roohi

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@rehana-roohi

Rehana Roohi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rehana Roohi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मैं ये भी चाहती हूँ तिरा घर बसा रहे और ये भी चाहती हूँ कि तू अपने घर न जाए — Rehana Roohi
हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ — Rehana Roohi

Ghazal

दिल को रह रह के ये अंदेशे डराने लग जाएँ वापसी में उसे मुमकिन है ज़माने लग जाएँ सो नहीं पाएँ तो सोने की दुआएँ माँगे नींद आने लगे तो ख़ुद को जगाने लग जाएँ उस को ढूँडें उसे इक बात बताने के लिए जब वो मिल जाए तो वो बात छुपाने लग जाएँ हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ इतनी ताख़ीर से मत मिल कि हमें सब्र आ जाए और फिर हम भी नज़र तुझ से चुराने लग जाएँ जीत जाएँगी हवाएँ ये ख़बर होते हुए तेज़ आँधी में चराग़ों को जलाने लग जाएँ तुम मिरे शहर में आए तो मुझे ऐसा लगा जूँ तही-दामनों के हाथ ख़ज़ाने लग जाएँ — Rehana Roohi