dil ko rah rah ke ye andeshe daraane lag jaayen | दिल को रह रह के ये अंदेशे डराने लग जाएँ

  - Rehana Roohi

दिल को रह रह के ये अंदेशे डराने लग जाएँ
वापसी में उसे मुमकिन है ज़माने लग जाएँ

सो नहीं पाएँ तो सोने की दुआएँ माँगें
नींद आने लगे तो ख़ुद को जगाने लग जाएँ

उस को ढूँडें उसे इक बात बताने के लिए
जब वो मिल जाए तो वो बात छुपाने लग जाएँ

हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं
फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ

इतनी ताख़ीर से मत मिल कि हमें सब्र आ जाए
और फिर हम भी नज़र तुझ से चुराने लग जाएँ

जीत जाएँगी हवाएँ ये ख़बर होते हुए
तेज़ आँधी में चराग़ों को जलाने लग जाएँ

तुम मिरे शहर में आए तो मुझे ऐसा लगा
जूँ तही-दामनों के हाथ ख़ज़ाने लग जाएँ

  - Rehana Roohi

Sabr Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Rehana Roohi

As you were reading Shayari by Rehana Roohi

Similar Writers

our suggestion based on Rehana Roohi

Similar Moods

As you were reading Sabr Shayari Shayari