Rishirajsingh Dhirawat

Rishirajsingh Dhirawat

@rishirajsinghdh401922

Rishirajsingh Dhirawat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rishirajsingh Dhirawat's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

स्केच पर तेरे उकेरे जा रहे हैं जंग के नुक़सान जंग से पहले ज़मीं का सारा आलम ख़ूब-सूरत था — Rishirajsingh Dhirawat

Ghazal

ख़ुशी से दंग करना है करो फिर ये कहानी में गिरा दो ग़ैर से पहनी अँगूठी तेज़ पानी में तिरी इक मौज पे हो के नज़र है दूसरी पे गर कमी आने का ख़तरा फिर रहेगा ही रवानी में चमक में क़ाफिये की, रब्त ही तोड़ आए मिसरे से भुगतना ही पड़ेगा खामियाज़ा फिर बयानी में वो कहती है मुझे देखो, रहो चाहे ख़फ़ा मुझ सेे मगर लहजा ये शामिल ही नहीं मेरी ज़बानी में हमारी दास्तान-ए-इश्क़ को इक शे'र समझो तुम अधूरापन जो बाकी था हुआ पूरा वो सानी में निशानी छोड़ी है जिस शर्ट पे, महफूज़ नईं यूँँ ही बिताया हम ने इक-इक पल है उस की पासबानी में अभी तक के सफ़र में जो बने हैं मील के पत्थर न जाने होंगे भी हासिल हमें वो ज़िंदगानी में ? परिंदा क़ैद में है तो सुनोगे चीख ही उस की तराना ख़ुशनुमा याद आए कैसे राइगानी में — Rishirajsingh Dhirawat