Sagheer Malal

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Sagheer Malal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sagheer Malal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तअज्जुब उन को है क्यूँँ मेरी ख़ुद-कलामी पर हर आदमी का कोई राज़-दाँ ज़रूरी है — Sagheer Malal
इन से बचना कि बिछाते हैं पनाहें पहले फिर यही लोग कहीं का नहीं रहने देते — Sagheer Malal

Ghazal

किसी इंसान को अपना नहीं रहने देते शहर ऐसे हैं कि तन्हा नहीं रहने देते इन से बचना कि बिछाते हैं पनाहें पहले फिर यही लोग कहीं का नहीं रहने देते पहले देते हैं दिलासा कि बहुत कुछ है यहाँ और फिर हाथ में काँसा नहीं रहने देते कभी नाकाम भी हो जाते हैं वो लोग कि जो वापसी का कोई रस्ता नहीं रहने देते दाएरे चंद हैं गर्दिश में अज़ल से जो यहाँ कोई भी चीज़ हमेशा नहीं रहने देते जिस को एहसास हो अफ़्लाक की तन्हाई का देर तक उस को अकेला नहीं रहने देते वाक़ई नूर लिए फिरते हैं सर पे कोई अपने अतराफ़ जो साया नहीं रहने देते ज़िंदगी प्यारी है लोगों को अगर इतनी 'मलाल' क्यूँँ मसीहाओं को ज़िंदा नहीं रहने देते — Sagheer Malal