SZUBAIR KHAN KHAN

SZUBAIR KHAN KHAN

@szubairkhankhan

SZUBAIR KHAN KHAN shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in SZUBAIR KHAN KHAN's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

0

Content

18

Likes

9

Shayari
Audios
  • Sher

Sher

हम ग़म उठाते हैं वो जनाज़ा उठाते हैं अब आगे-आगे देखिए क्या-क्या उठाते हैं — SZUBAIR KHAN KHAN
हर बात की ख़बर है हर बात की क़दर है महबूब के मुक़ाबिल हर बात बे-असर है — SZUBAIR KHAN KHAN
देखता हूँ ज़ुबैर दुनिया को ख़ुद को ज़्यादा सही समझती हैं — SZUBAIR KHAN KHAN
इश्क़ दस्तूर है निगाहों का मैं ज़माने को ये बताऊॅंगा — SZUBAIR KHAN KHAN
शम्अ' कब तक जलाए हाथों में ये भी बेटी जहाँ से कहती है — SZUBAIR KHAN KHAN
शोर ग़ुल रोज़ होता है तेरा पूछता हूँ मैं माजरा क्या है — SZUBAIR KHAN KHAN
ऐ ख़ुदा ख़ाक कर तू दुनिया को ये न ही तेरी है न ही मेरी — SZUBAIR KHAN KHAN
कोई दुनिया में है नहीं ऐसा दर्द ग़म बाँट ले दुआ कर दे — SZUBAIR KHAN KHAN
बे-ख़बर तू बना हुआ ख़ुद से जानता हैं तिरी ख़ता क्या है — SZUBAIR KHAN KHAN
कमज़र्फ़ हो गए हैं बद काम करते करते अब शर्म आती भी है आराम करते करते — SZUBAIR KHAN KHAN
ख़ुद से वफ़ा नहीं की ख़ुद से ज़फ़ा नहीं की तुम कहते हो कि ख़ुद से हम ने ख़ता नहीं की — SZUBAIR KHAN KHAN
फैली नफ़रत जहाँ जहाँ में है कौन तू जानते नहीं तुझ को — SZUBAIR KHAN KHAN
जीता था वो ज़ुबैर दुनिया में याद आके भी याद आता है — SZUBAIR KHAN KHAN
थी न कुछ भी ख़ता मेरे दिल की तोड़ के दिल हमें जताया है — SZUBAIR KHAN KHAN
ग़म नहीं थे तो फिर भी अच्छा था आज ग़म है कहाँ ये अच्छा है — SZUBAIR KHAN KHAN
मैं परिंदा ज़बान रखता हूँ देख के बोलना नहीं आता — SZUBAIR KHAN KHAN
वो हमें ख़ाक कर रहे होंगे हुस्न की आग को धुआँ कर के — SZUBAIR KHAN KHAN
ज़िंदगी में गिला अगर होता हम तुम्हें 'आशिक़ी नहीं कहते — SZUBAIR KHAN KHAN